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 शरीर को सात्विक रखें : पुष्पेन्द्र मुनि

शाकाहार वास्तव में एक वैज्ञानिक धारणा है। उसके कई अर्थ है - जिनमें पहला तो यह है कि जीव की हिंसा नहीं की जानी चाहिए और दूसरा यह है कि भोजन में केवल वे वस्तुएं शामिल हो जो शरीर को सात्विक रखें अर्थात् हमारे मन में हमारे शरीर के द्वारा हिंसा का भाव उदय न हो। शाकाहार करने वाला सद्गुणी, चरित्रवान और नैतिकता से पूर्ण इन्सान कहलाने के योग्य होता है। मनुष्य के लिए शाकाहार है और शाकाहार के लिए मनुष्य है।

भारतीय संस्कृति आर्य संस्कृति की आधारशिला है। आर्य संस्कृति का आहार भोजन शुद्ध शाकाहार ही रहा तभी…

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