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आधुनिक परिवेश में जहां जंक फूड अधिक प्रचलन में हैं, उसी अनुपात में शाक-सब्जी, फल कम उपयोग में लिए जाते हैं। ऐसे में लाइफ स्टाइल डिजीज की श्रेणी में आने वाली बीमारियां बढ रही हैं। शाक व फलों के पर्याप्त सेवन से इन व्याधियों से बचकर स्वस्थ जीवन पाया जा सकता है।

शाक, सब्जी, फलों में फाइबर्स (रेशे) होते हैं जो आंत की गति सही रखते हैं। कब्ज, अपच, अजीर्ण नहीं होता। हालांकि भोजन के बाद शाक, सलाद फल नहीं खाने चाहिए क्योंकि अन्न को अमाशय से ग्रहणी व छोटी आंत में पहुंचने में समय लगता है जबकि शाक फल 20 मिनट में पच जाते हैं। अन्न के अवरोध के कारण वे ग्रहणी मे पहुंच नहीं पाते, फलस्वरूप अमाशय में ही उनका किण्वन प्रारंभ हो जाता है जिससे पेट व गले में जलन होने लगती है।

 

कब्ज के कारण पाइल्स, फिशर आदि व्याधियां होने का खतरा बढ़ जाता है। शाकाहार को भोजन में सम्मिलित करने से इन बीमारियों की आशंका अत्यन्त कम हो जाती है। पुराना पाइल्स लम्बे समय तक अनुपचारित रहने पर कैंसर में प्रवर्धित हो सकता है। बड़े व कई पाइल्स एक साथ होने पर गुदा भ्रंश हो सकता है। कब्ज से ही ये सब प्रारंभ होते हैं, कब्ज नहीं रहेगी तो ये सब आशंकाएं भी नहीं रहेंगी।

अधिक कैलोरी लेने व उसका उपयोग नहीं होने पर मोटापा, मधुमेह, धमनी काठिन्य आदि व्याधियां बढ़ रही हैं। भोजन में शाकाहार का अनुपात बढऩे से अधिक कैलोरी वाले खाद्यानों में कटौती हो जाती है और इन व्याधियों की आशंका कम हो जाती है। हरी सब्जियों, फलों में एन्टी ऑक्सीडेंट होते हैं, जो शरीर में नई कोशिकाओं व रक्त का निर्माण करते हैं।

शाकाहार से मन सात्विक रहता है। सात्विकता से मनोविकार की आशंकाएं कम हो जाती हैं। बुद्धि व स्मृति प्रखर होती है। मन भी क्रोध, मद, वासना, मोह, लोभ आदि दुर्विचारों से मुक्त रहता है। तामसिक भोजन से बुद्धि, स्मृति सब दूषित होती हैं। इनके दोष ही मनोविकारों को जन्म देते हैं। शाकाहार इनसे हमें बचाता है।

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