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Dalai-Lama1

तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने कहा है कि किसी प्राणी की हत्या करना सही नहीं है। उन्होंने बोमडिला में एक सवाल के जवाब में कहा कि बौद्धों में बहुत से लोग शाकाहारी होते हैं क्योंकि उनका मानना है कि किसी प्राणी की हत्या करना गलत है। उनसे पूछा गया था कि क्या भारत में खाने की आदत एक मुद्दा होना चाहिए और क्या बौद्ध धर्म गैर-शाकाहार का समर्थन करेगा?

उन्होंने यह भी कहा, बौद्ध लोग न शाकाहारी हैं और न ही मांसाहारी हैं। दलाई लामा ने कहा कि भारत अब भी एक सर्वश्रेष्ठ देश है जो धार्मिक सद्भाव और सहिष्णुता का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि भारत सबसे ज्यादा आबादी वाला लोकतांत्रिक देश है जिसने हजारों वर्षों से मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि धर्म को दयालुता सिखानी चाहिए। आध्यात्मिक नेता ने कहा, मेरा धर्म करूणा है। सभी धर्मों में सद्भाव को बढ़ावा देने की व्यापक गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर आतंकवाद से वह विक्षुब्ध हैं।

दलाई लामा ने देश में संस्कृत को प्रचलित करने के भारत सरकार के कदम का भी सर्मथन किया और कहा कि भारत को प्राचीन ज्ञान पर अधिक ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, मैं प्राचीन भारतीय ज्ञान का बहुत सम्मान करता हूं। भारतीयों को प्राचीन ज्ञान और समृद्ध संस्कृत परंपरा पर अधिक ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि तिब्बती भाषा संस्कृत के करीब है और दोनों भाषाएं दर्शन और आध्यात्मिकता को समझाने के लिए आदर्श हैं। दलाई लामा ने कहा, मैं तिब्बती मामले की राजनीतिक भूमिका से 2011 में सेवानिवृत्त हो चुका हूं और तब से मेरा फोकस तिब्बती संस्कृति और भाषा के संरक्षण पर है।

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