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हिन्दी एवं शाकाहार के प्रति प्रतिबद्ध आचार्य विद्यासागर जी

भारत-भू पर सुधारस की वर्षा करने वाले अनेक महापुरुष और संत कवि जन्म ले चुके हैं। उनकी साधना और कथनी-करनी की एकता ने सारे विश्व को ज्ञान रूपी आलोक से आलोकित किया है। इन स्थितप्रज्ञ पुरुषों ने अपनी जीवनानुभव की वाणी से त्रस्त और विघटित समाज को एक नवीन संबल प्रदान किया है। जिसने राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और संस्कृतिक क्षेत्रों में क्रांतिक परिवर्तन किये हैं। भगवान राम, कृष्ण, महावीर, बुद्ध, ईसा, हजरत मुहम्मदौर आध्यत्मिक साधना के शिखर पुरुष आचार्य कुन्दकुन्द, पूज्यपाद्, मुनि योगिन्दु,…

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इसलिए जैन नहीं खाते लहसुन-प्याज

हिंदू धर्म और जैन धर्म के अनुयायी धार्मिक कार्यों में बनने वाले भोजन में लहसुन-प्याज को वर्जित मानते हैं। ये परंपरा आज भी जीवित है। हालांकि इसे मानने वाले लोग बहुत कम हैं। दरअसल लहसुन-प्याज पौधों की जड़े हैं जिन्हें भोजन में मसाले के रूप में उपयोग करते हैं। जैन धर्म अहिंसा का समर्थन करता है लेकिन प्याज और लहसुन जैसे तामसिक खाद्य पदार्थ क्रोध और तनाव को विकसित करते हैं। इसलिए पारंपरिक विचार रखने वाले जैन धर्म के अनुयायी बिना प्याज और लहसुन वाला भोजन ही करते हैं।…

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अहिंसा और शाकाहार के लिए समर्पित शफीक खान को जैन मुनि ने किया सम्मानित

शफीक खान ऐसे मुसलमान हैं जिनके जीवन का लक्ष्य देश-दुनिया में अहिंसा और शाकाहार का प्रचार करना है. इस नेक काम के लिए उन्हें भारत सरकार की तरफ से महावीर एवार्ड पहले ही मिल चुका है. पिछले दिनों उन्हें एक जैन मुनि ने अपनी तरफ से सम्मानित किया. शफीक खान मध्य प्रदेश के सागर जिले के निवासी हैं. वे विचार संस्था के उपाध्यक्ष भी हैं. 108 आचार्य वर्धमानसागर महाराज जी, जो दिगम्बर तीर्थ क्षेत्र कुण्डलगिरी कुण्डलपुर जी दमोह म0प्र0 में चातुर्मास हेतु विराजे हैं, के सानिध्य में कुण्डलपुर तीर्थ क्षेत्र कमेटी के…

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