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हिंदू धर्म और जैन धर्म के अनुयायी धार्मिक कार्यों में बनने वाले भोजन में लहसुन-प्याज को वर्जित मानते हैं। ये परंपरा आज भी जीवित है। हालांकि इसे मानने वाले लोग बहुत कम हैं। दरअसल लहसुन-प्याज पौधों की जड़े हैं जिन्हें भोजन में मसाले के रूप में उपयोग करते हैं। जैन धर्म अहिंसा का समर्थन करता है लेकिन प्याज और लहसुन जैसे तामसिक खाद्य पदार्थ क्रोध और तनाव को विकसित करते हैं। इसलिए पारंपरिक विचार रखने वाले जैन धर्म के अनुयायी बिना प्याज और लहसुन वाला भोजन ही करते हैं।

कामेच्छा को करता है प्रेरित

यह अन्य सब्जियों और शाकाहारी आहार की तरह ही हैं। पौराणिक ग्रंथों खासतौर पर हमारे आयुर्वेद ग्रंथों में भोजन को तीन श्रेणियों में बांटा गया है, सात्विक, राजसिक और तामसिक। पौराणिक ग्रंथों में लहसुन और प्याज तामसिक भोजन के प्रकार हैं, इनका सेवन व्यक्ति के भीतर उत्तेजना के साथ-साथ तनाव और अशांति भी पैदा करता है। इसके अलावा क्रोध और कामेच्छा को भी बढ़ाते हैं। प्याज व लहसुन में रोग प्रतिरोधक गुण होते हैं। वैष्णव धर्म (हिंदू धर्म का एक भाग) में ही नहीं बल्कि और भी कई धर्मों में प्याज और लहसुन को शैतानी गुणों वाला माना गया है। भगवान कृष्ण के उपासक भी प्याज और लहसुन नहीं खाते क्योंकि यह लोग प्याज और लहसुन कभी भी श्रीकृष्ण को अर्पित नहीं करते इसलिए कृष्ण भक्त इन्हें नहीं खाते।

विधवाओं के लिए वर्जित

अमूमन ऐसा सुना जाता है कि विधवाओं को लहसुन-प्याज नहीं खाने चाहिए। क्योंकि ये हार्मोंस को प्रभावित करते हैं। ये काम के लिए प्रेरित करते हैं और व्यक्ति के भीतर कामेच्छा बढ़ाते हैं, इसलिए विधवाओं के लिए लहसुन और प्याज का सेवन करना वर्जित कहा गया है।

विदेशों में भी है चर्चित

प्राचीन मिस्त्र के पुरोहित प्याज और लहसुन को नहीं खाते थे। चीन में रहने वाले बौद्ध धर्म के अनुयायी भी इन कंद सब्जियों को खाना पसंद नहीं करते। हिंदू धर्म के आधार यानी वेदों में उल्लेखित है कि प्याज और लहसुन जैसी कंदमूल सब्जियां निचले दर्जे की भावनाओं जैसे जुनून, उत्तजेना और अज्ञानता को बढ़ावा देती हैं। चीन और जापान में रहने वाले बौद्ध धर्म के लोगों ने कभी इसे अपने धार्मिक रिवाजों का हिस्सा नहीं बनाया। जापान के प्राचीन खाने में कभी भी लहसुन का प्रयोग नहीं किया जाता था। यह व्यक्ति की चेतना को प्रभावित करती हैं इसलिए इन्हें नहीं खाना चाहिए। तुर्की में भी इन सब्जियों को प्रयोग ना करने के पीछे एक किंवदंती प्रचलित है। कहा जाता है कि जब भगवान ने शैतान को स्वर्ग से बाहर फेंका तो जहां उसका बायां पैर जहां गिरा वहीं से लहसुन और जहां दायां पैर पड़ा वहां से प्याज के पौधों का जन्म हुआ।

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