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green mark

अगर आप वेजिटेरियन हैं तो जाहिर है कि पैकेट्स पर ग्रीन मार्क देखकर ही खरीदते होंगे। ग्रीन मार्क इसलिए, क्योंकि उसे वेजिटेरियन का साइन माना जाता है। लेकिन जिस ग्रीन मार्क को आप वेजिटेरियन समझ कर खाते हैं, क्या वो वाकई आपको गुमराह तो नहीं करता है। हम आपको बताते हैं इसकी असलियत।

ज्यादातर कंपनियां अपने प्रॉडक्ट के टेस्ट को बढ़ाने के लिए टेस्ट एनहांसर का इस्तेमाल करती हैं। ये टेस्ट एनहांसर एक रसायन है जो मांस अथवा मछली से प्राप्त किया जाता है। इसलिए यह शाकाहारियों के लिए बिल्कुल अनुपयुक्त है। अब आप यह सोचेंगे कि भला नॉनवेज का इस्तेमाल करने के बावजूद ये वेजिटेरियन फूड क्यों हैं?

ये बात पूर्ण सत्य है कि खाने-पीने के उत्पादों पर हरा निशान शाकाहार होने का प्रतीक है। लाल निशान मांसाहार होने का। जब 1993 में ये कानून आया तो इसमें शाकाहार और मांसाहार की परिभाषा भी तय की गई। उसके अनुसार पशु पक्षियों के बाल, नाखून, पंख, लार, चर्बी और अंडे के जर्दी से बने पदार्थ या एडिएक्टिव को भी शाकाहार की श्रेणी में रखा गया है। इसलिए बेशक आपके अनुसार ऊपर की चीजें मांसाहार हो सकती है लेकिन हरे और लाल निशान के कानून के आधार पर ये शाकाहार ही है। इसलिए कई कंपनियां आपको हरे लाल निशान के चक्कर में धोखा देती हैं।

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