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बिरसा मुंडा के शाकाहार के आदर्श झारखंड में उपेक्षित


बिरसा मुंडा जानते थे कि आदिवासी समाज में शिक्षा का अभाव है, गरीबी है, अंधविश्वास है, बलि प्रथा पर भरोसा है, हड़िया कमजोरी है, मांस-मछली पसंद करते हैं. समाज बंटा है, लोग से झांसे में आ जाते हैं. इन समस्याओं के समाधान के बिना आदिवासी समाज का भला नहीं हो सकता. इसलिए उन्होंने एक बेहतर लीडर/समाज सुधारक की भूमिका अदा की. अंगरेजों और शोषकों के खिलाफ संघर्ष भी जारी रखा. उन्हें पता था कि बिना धर्म के सबको साथ लेकर चलना आसान नहीं होगा. इसलिए बिरसा ने सभी धर्मो की अच्छाइयों से कुछ न कुछ निकाला और अपने…

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पशु संरक्षण हमारी परम्परा बने

गुजरात और राजस्थान पशुपालन एवं संरक्षण के लिए प्रसिद्व है , इन राज्यों में दुग्धा उत्पादन के साथ-साथ वृध्द एव असहाय पशुओं कों सहारा देने के लिए बड़ी-बड़ी गौशालाओं के निर्माण की परम्परा है।इन गौशालाओं में पशुओं के लिए आश्रयै आहार एवं चिकित्सा की अच्छी व्यवस्था होती हैं। गुजरात के पाटण जिले में एक जगह है भाभर,यहाँ संत जलाराम के नाम पर एक बड़ी गौशाला स्थित है जिसमें लगभग 3500 वृद्व एव असहाय गौवंश शरण लिए हुए है।
इस गौशाला में पशुओं की चिकित्सा के लिए एक सुसज्जित चिकित्सालय है जिसमें पशुओं के लिए…

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जर्मनी में बढ़ रहे हैं शाकाहारी

पहली नवंबर का दिन विश्व वीगन दिवस के रूप में मनाया जाता है. 8 करोड़ की आबादी वाले जर्मनी में करीब 6 लाख लोग वीगन हैं और उनमें से बहुत से सख्ती से उसका पालन भी करते हैं. उनके लिए खान पान एक राजनीतिक रवैया भी है.…

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