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जैसे कि हमारे जीवन में हरियाली का महत्व है, वैसे ही हरा भरा वायुमण्डल स्वच्छ व स्वास्थ्यवर्धक होता है। इसलिए शाकाहार का हमारे जीवन में महत्व है। शाकाहार हमारे जीवन को स्वस्थ व दीर्घायु बनाता है। मांसाहार कई रोग पैदा करता है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, रक्त व चर्म रोग, पीलिया, पेट के विभिन्न रोग, कैंसर, किडनी के रोग, मानसिक विकार की संभावना मांसाहारियों में अधिक होती है। नियमित रूप से मांस का सेवन करने से रक्त वाहिनियों में कोलेस्ट्रोल जमा हो जाता है। मांसाहार का पाचन तंत्र पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। मांस अधिक खाने से लीवर खराब होता है। इससे पीलिया हो जाता है। मांस में विभिन्न रोगों के कीटाणु होते हैं। पशु किसी रोग से संक्रमित हो तो वे कीटाणु मांस खाने वालों के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। मांसाहारी प्रायः आक्रामक, हिंसक व अत्यधिक तनाव के शिकार होते हैं जिससे हाइपरटेंशन होता है। उनका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। चिकन (मुर्गा) खाने से कई रोग शरीर में संक्रमित हो जाते हैं प्रायः मुर्गे व मुर्गियां किसी न किसी रोग से ग्रस्त होती हैं। जिनका सेवन शरीर को रोगग्रस्त करता है।

डेंगू व चिकनगुनिया से रोगग्रस्त मुर्गियां खाने से व्यक्ति रोगग्रस्त हो सकता है। इनके अंडे शरीर में वायरस पैदा करते हैं। मांसाहार से यौवन में शक्ति मिलती है लेकिन इससे शरीर की आंतरिक जीवन शक्ति का हृास होता है। मध्य आयु के बाद मांसाहारियों के जोड़ों में दर्द, गठिया व अन्य अस्थियों की बीमारी हो जाती है। मांसाहार शरीर को मोटा करता है व आयु को क्षीण करता है। मोटापा कई रोगों का घर होता है। इसलिए चिकित्सक मोटे लोगों को मांस छोड़ने की सलाह देते हैं।
जो लोग शाकाहारी हैं, शरीर से चुस्त व स्वस्थ होते हैं। आदि मानव कभी बीमार नहीं पड़ते थे। यदि आज का मानव आदि मानव से प्रेरणा ले व शाकाहार अपनाये तो वह रोगमुक्त हो सकता है। शाकाहार लेने से दो महीने में ही रक्तवाहिनियां साफ हो जाती हैं और ब्लोकेज (रक्त अवरोध) खत्म हो जाता है।
हाल में यूनिवर्सिटी आफ हयूस्टन लेबोरेट्री आॅफ फिजियोलाॅजी के शोध के अनुसार दो महीने में ही शाकाहार से हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है। इस शोध में आठ लोगों को शामिल किया गया था। उन्हें फल व साग सब्जियां खाने को दी गयीं। इन लोगों में इन्टरलयूमिन 10 (आई0एल0 10) की मात्रा बढ़ गयी है जो इम्युनिटी सिस्टम द्वारा पैदा अणु है और रक्तवाहिनियों की रक्षा करता है। इससे उनमें स्फूर्ति व शक्ति की वृद्धि दर्ज की गयी। उनके खाने की ऊर्जा 22 से 40 प्रतिशत बढ़ गयी।
शाकाहार हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। कई जड़ी-बूटियों में पौधे व साग-सब्जियां रोग दूर करती हैं। करेले के सेवन से शुगर लेवर घटता है। यह पीलिया व पेट के रोगों की औषधि है। मेथी से डायबिटीज व रोग दूर होता है। यह शरीर के कोलेस्ट्रोल को कम करता है और कई रोगों में इसका लाभ होता है। आंवला शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करता है। यह फल रक्त साफ करता है और वृद्धावस्था को दूर करता है। अनार से विटामिन सी व आयरन मिलता है। खट्टे फल विटामिन सी के अच्छे स्रोत हैं। एनीमिया के रोगियों को साग-सब्जियों व फलों का सेवन करना चाहिए। सेब से ब्लड काउंट बढ़ता है। शाकाहार से वे लाभ हैं जो मांसाहार से नहीं मिलते हैं। मांस में वसा व प्रोटीन होती है। वसा से शरीर स्थूल होता है। अधिक प्रोटीन का सेवन अधिक आयु में हानिकारक है।
विश्व में मांसाहार के सेवन से करोड़ों लोगों की जान जाती है। नियमित रूप से मांस खाने वालों को हाईब्लड प्रेशर, मानसिक तनाव, आंत व किडनी के रोग होते हैं। आयु वृद्धि के साथ मांस के सेवन की आदत कम करनी चाहिए। मांसाहार से हिंसक व आक्रामक प्रवृत्ति में वृद्धि होती है जिसके कारण युद्ध, हत्याएं, अपराध व हिंसक घटनाएं होती हैं। मांसाहार वायुमण्डल को दूषित करता है। मोटे लोग वायुमण्डल में प्रदूषण फैलाते हैं। मोटे लोग पृथ्वी पर भार होते हैं जिससे गुरूत्व शक्ति में वृद्धि होती है। अधिक मोटे लोगों के कारण भूकम्प की संभावनायें भी बढ़ जाती हैं। इसे ऐसा समझिये जैसे किसी क्षेत्र में मोटे लोगों को उछलकूद करने को कहा जाये तो उनका यह कृत्य उस क्षेत्र में कंपन पैदा कर देता है जिसे भूकम्पमापी यंत्र से नापा जा सकता है। मोटे लोग अधिक कार्बन डाई आक्साईड वातावरण में छोड़ते हैं और आक्सीजन ग्रहण करते हैं जिससे वायुमण्डल दूषित होता है। यदि आसपास पेड़ पौधे व हरियाली न हो तो उस क्षेत्र में वायु प्रदूषण बढ़ जाता है मोटे लोग जितना आहार लेते हैं, उनके कई कुपोषित लोगों को पोषण मिल सकता है जिससे भुखमारी मिट सकती है। मोटे लोग इतनी अधिक मात्रा में कार्बनडाई आक्साइड छोड़ते हैं जिससे ग्लोबल वार्मिग का खतरा बढ़ जाता है। मांस निर्माण व पैकेजिंग की फैक्ट्रियों को आसपास अधिक प्रदूषण पाया गया है।
मांसाहारियों को एनीमिया की शिकायत हो जाती है। शाकाहार में एंटीआक्सीडेंट तत्व होते हैं। मांसाहारियों में हीमोग्लोबिन का स्तर कम होता है। हीमोग्लोबिन रक्त की कोशिकाओं में उपस्थित प्रोटीन आक्सीजन को शरीर के विभिन्न अंगों में पहुंचाने में मदद करता है। मांसाहारियों में इसकी कमी होती है। रक्त कोशिकाओं को आक्सीजन नहीं मिलती। इसलिए जीवनों की रक्षा व हरियाली के संरक्षण से पर्यावरण प्रदूषण पर नियंत्रण लाया जा सकता है। साग-सब्जियों से व फलों के पौधों के संरक्षण से यह संभव है। (हिफी)

(बृजमोहन पन्त-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

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