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सिंहस्थ 2016 ग्रीन सिंहस्थ होगा। इसके लिए व्यापक तैयारियां की जा रही है। उज्जैन को हरियाली युक्त बनाने की कोशिशें जारी है। वैसे भी बारिश के मौसम में उज्जैन हरा-भरा हो ही जाता है, लेकिन इस बार कोशिश है कि कोई भी जगह ऐसी न छूटे, जहां हरियाली लगाई जा सकती हो और हरियाली नहीं देखने को मिले। सड़कों के डिवाइडर हरे-भरे किए जा चुके है। बगीचों में हरियाली का विशेष ध्यान रखा जा रहा है और ग्रीन सिंहस्थ, क्लीन सिंहस्थ का नारा बुलंद किया जा रहा है। इस नारे के स्पीकर उज्जैन के हजारों वाहनों पर नजर आ रहे है। उज्जैन जाने वाले रास्तों पर जहां भी माइल स्टोन लगे हैं, उन पर 'सिंहस्थ 2016' भी जोड़ दिया गया है।

उज्जैन शहर और सिंहस्थ मेला क्षेत्र को हरा-भरा बनाने का काम नगर निगम और वन विभाग कर रहा है। यह हरियाली ऐसे लगाई जा रही है मानो उज्जैन कोई मेट्रो सिटी हो। सिंहस्थ क्षेत्र में आने वाले सभी लोगों को सुकून का एहसास हो, इसके लिए तमाम सुविधाएं जुटाई जा रही है। इस बार सिंहस्थ मेला क्षेत्र का आकार लगभग दोगुना से भी ज्यादा होने की संभावना है। सिंहस्थ के लिए प्रशासन ने 3061 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की है। इसलिए किसानों की जमीनें अस्थायी तौर पर अधिग्रहित की जाने वाली है। किसानों की उस जमीन पर खेती की दो फसलें नहीं ली जा सकेंगी। कोशिश है कि वह जमीन भी अस्थायी तौर पर ही सही, हरि-भरी नजर आएं। प्रशासन किसानों को दो फसलों का मुआवजा देने वाला है। जिन किसानों ने फसल बो दी है और वे अगर एक फसल ले लेते है, तो उन्हें एक फसल का ही मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए पटवारी सर्वे कार्य में लग गए है, वे खेत-खेत जाकर हालात का जायजा ले रहे है।

प्रशासन ने पूरे मेला क्षेत्र का डिजिटल ज्योग्रोफिकल इन्फरमेशन सिस्टम पर आधारित नक्शा तैयार कर लिया है। इसी के आधार पर मुख्य सड़कों और छोटे मार्गों का मेपिंग हो रहा है। पचास लेयर में तैयार इस नक्शे से हर विभाग को यह पता चल जाएगा कि कहां-कहां कौन-कौन सी गतिविधियां हो रही है और किस तरह की सुविधाएं श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराई जा रही है। पार्किंग स्थलों या घाट की सुविधाएं एप्रोच रोड हो या पेशवाई मार्ग, बिजली सप्लाई की स्थिति हो या ड्रेनेज की व्यवस्था, हेल्प काउंटर्स की जानकारी हो या एटीएम की मौजूदगी- झोन वार और सेक्टर वार हर जानकारी व्यवस्थित की जा रही है। नक्शे के साथ ही संबंधित विभागों के प्रभारी अधिकारी, कर्मचारी, सर्विस प्रोवाइडर आदि के मोबाइल नंबर भी उपलब्ध रहेंगे।
पांच करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावनाओं को देखते हुए दस हजार से भी अधिक कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। ये कर्मचारी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखेंगे। इस सुरक्षा व्यवस्था में आपातकालीन स्थिति में होने वाली किसी भी घटना या दुर्घटना के लिए बचाव के पूरे प्रबंध होंगे। सिंहस्थ में आने वालों पर पूरी निगरानी रहेगी। भिखारियों को स्नान घाट, प्रवेश द्वार और निकासी मार्गों से दूर कर दिया जाएगा। छोटे बच्चों को भीख मांगते पाए जाने पर पुलिस हरकत में आ जाएगी। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि भिखारियों के वेश में असामाजिक तत्वों का प्रवेश आसान होता है। कर्मचारियों को ट्रेनिंग इस तरह दी जा रही है कि वे भिखारियों पर सतत् निगाह तो रखेंगे ही, आवश्यकता पड़ने पर खुद भी कोई कार्रवाई कर सकेंगे। मानवीय पहलुओं का भी यहां ध्यान रखा जाएगा।

यह सिंहस्थ कई मामलों में अनूठा रहने की संभावना है। यह तो वक्त ही बताएगा कि दुनिया के इस सबसे बड़े मेले को लोग भविष्य में किस तरह याद रखते है।
--प्रकाश हिन्दुस्तानी

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